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बहार दो hindikavita बहार बदल गया इंसान लुटे सरेआम प्यार हिन्दीकविता में मिठास मेरे मन का पहाड़ बस अब गांव पहाड़ की व्यथा इंसान स्वार्थी समय बदल गया में गया मेरे मन में बदल जीवन पहाड़ की छांव में

Hindi बदल गया बहार में Poems