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जीवन हिन्दीकविता hindikavita इंसान स्वार्थी बहार दो मेरे मन का पहाड़ में मिठास collegewritingchallenge बस में बदल गया डिग्रियां बिकती बदल गया इंसान अब गांव बहार पहाड़ की छांव में लुटे सरेआम प्यार समय बदल गया

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